Today OfferFree Coupon Codes, Promotion Codes, Discount Deals and Promo Offers For Online Shopping Get Offer

उत्तराखंड सामान्य ज्ञान: प्राचीन काल (Ancient history of Uttarakhand GK in Hindi)

उत्तराखंड सामान्य ज्ञान: प्राचीन काल (Ancient history of Uttarakhand GK in Hindi)

यहाँ हम उत्तराखंड सामान्य ज्ञान: प्राचीन काल (Ancient history of Uttarakhand GK in Hindi) का संक्षिप्त विवरण दे रहे हैं जो UKPSC, UKSSSC, State Services, UBTER,  जैसी राज्य स्तरीय  प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

उत्तराखंड ऐतिहासिक काल को निम्न तीन भागो में बांटा जा सकता है 


उत्तराखंड सामान्य ज्ञान प्राचीन काल (Ancient history of Uttarakhand GK in Hindi)


  • कुणिन्द राजवंश उत्तराखंड पर शासन करने वाली पहली राजनैतिक शक्ति थी |
  • कुणिन्द उत्तराखंड पर शासन का श्रोत उनकी मुद्राओं से ज्ञात होता है 
  • महाभारत व अष्टधयाई में कुणिन्द के बारे में सर्वाधिक सूचना मिलती है , महाभारत में अनेक स्थानों पर कुणिन्द शब्द का उल्लेख  है। 
  • अमोघभूति  कुणिन्द राजवंश में सबसे प्रतापी राजा था। जिसकी मुद्रायें पश्चिम में सतलज व्यास से लेकर अलकनन्दा तक , तथा दक्षिण में सुनेत तथा बेहत तक मिली है। 
  • कुणिन्द शासकों की  सर्वाधिक मुद्रायें अमोघभूति शासक की है।  ये चाँदी और ताम्र दोनों धातुओं की थी।  जबकि अन्य शासको की मुद्रायें केवल तांबे की थी। 
  • अशोक के कालसी अभिलेख से ज्ञात होता है की कुणिन्द प्रारंभ में मौर्यों के अधीन थे |
  • कुणिन्द वंश का सबसे शक्तिशाली राजा अमोधभूति था |
  • अमोधभूति की मृत्यु के बाद उत्तराखंड के मैदानी भागो पर शको ने अधिकार कर लिया , शको के बाद तराई वाले भागो में कुषाणों ने अधिकार कर लिया |
  • उत्तराखंड में यौधेयो के शाशन के भी प्रमाण मिलते है इनकी मुद्राए जौनसार बाबर तथा लेंसडाउन ( पौड़ी ) से मिली है |
  • ‘ बाडवाला यज्ञ वेदिका ‘ का निर्माण शीलवर्मन नामक राजा ने किया था , शील वर्मन को कुछ विद्वान कुणिन्द व कुछ यौधेय मानते है |
  •  


कर्तपुर राज्य

  1. कर्तपुर राज्य के संस्थापक भी कुणिन्द ही थे कर्तपुर में उत्तराखंड , हिमांचल प्रदेश तथा रोहिलखंड का उत्तरी भाग सामिल था |
  2. कर्तपुर के कुणिन्दो को पराजित कर नागो ने उत्तराखंड पर अपना अधिकार कर लिया |
  3. नागो के बाड़ कन्नोज के मौखरियो ने उत्तराखंड पर शासन किया |
  4. मौखरी वंश का अंतिम शासक गृह्वर्मा था हर्षवर्धन ने इसकी हत्या करके शासन को अपने हाथ में ले लिया |
  5. हर्षवर्धन के शासन काल में चीनी यात्री व्हेनसांग उत्तराखंड भ्रमण पर आया था |



कार्तिकेयपुर राजवंश –

  1. हर्ष की मृत्यु के बाद उत्तराखंड पर अनेक छोटी – छोटी शक्यियो ने शासन किया , इसके पश्चात 700 ई . में कर्तिकेयपुर राजवंश की स्थापना हुइ , इस वंश के तीन से अधिक परिवारों ने उत्तराखंड पर 700 ई . से 1030 ई. तक लगभग 300 साल तक शासन किया |
  2. इस राजवंश को उत्तराखंड का प्रथम ऐतिहासिक राजवंश कहा जाता है |
  3. प्रारंभ में कर्तिकेयपुर राजवंश की राजधानी जोशीमठ (चमोली ) के समीप कर्तिकेयपुर नामक स्थान पर थी बाद में राजधानी बैजनाथ (बागेश्वर ) बनायीं गयी |
  4. इस वंस का प्रथम शासक बसंतदेव था बसंतदेव के बाद के राजाओ के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलाती है इसके बाद खर्परदेव के शासन के बारे में जानकारी मिलती है खर्परदेव कन्नौज के राजा यशोवर्मन का समकालीन था इसके बाद इसका पुत्र कल्याण राजा बना , खर्परदेव वंश का अंतिम शासक त्रिभुवन राज था |
  5. नालंदा अभिलेख में बंगाल के पाल शासक धर्मपाल द्वारा गढ़वाल पर आक्रमण करने की जानकारी मिलती है इसी आक्रमण के बाद कार्तिकेय राजवंश में खर्परदेव वंश के स्थान पर निम्बर वंश की स्थापना हुई , निम्बर ने जागेश्वर में विमानों का निर्माण करवाया था
  6. निम्बर के बाद उसका पुत्र इष्टगण शासक बना उसने समस्त उत्तराखंड को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया था जागेश्वर में नवदुर्गा , महिषमर्दिनी , लकुलीश तथा नटराज मंदिरों का निर्माण कराया |
  7. इष्टगण के बाद उसका पुत्र ललित्शूर देव शासक बना तथा ललित्शूर देव के बाद उसका पुत्र भूदेव शासक बना इसने बौध धर्मं का विरोध किया तथा बैजनाथ मंदिर निर्माण में सहयोग दिया |
  8. कर्तिकेयपुर राजवंश में सलोड़ादित्य के पुत्र इच्छरदेव ने सलोड़ादित्य वंश की स्थापना की
  9. कर्तिकेयपुर शासनकाल में आदि गुरु शंकराचार्य उत्तराखंड आये उन्होंने बद्रीनाथ व केदारनाथ मंदिरों का पुनरुद्धार कराया | सन 820 ई . में केदारनाथ में उन्होंने अपने प्राणों का त्याग किया |
  10. कर्तिकेयपुर शासको की राजभाषा संस्कृत तथा लोकभाषा पाली थी |

Post a Comment

0 Comments