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Famous Important Lake in Uttarakhand | Uttarakhand General Knowledge Question

Famous Important Lake in Uttarakhand 
Uttarakhand General Knowledge Question PDF download.



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उत्तरकाशी की प्रमुख ताल/झीलें

1 नचिकेता ताल – उत्तरकाशी, चैरंगीखाल सड़क मार्ग पर स्थित है। इसके किनारे पर जनश्रुति मंदिर है।
2 डोडी ताल – यह 6 कोनों वाला ताल है। असौ नदी का उद्गम स्थल यहीं से है। इसी के कुछ दूरी पर काणाताल है।
3 काणाताल – यह बिना जल वाला ताल है।
4 फाचकण्डी बंया ताल – इस ताल का जल उबलता रहता है।
5 केदारताल – उत्तरकाशी, गंगोत्री मार्ग पर स्थित है। यह ताल थलैयासागर, जोगिन तथा भृगपंथ पर्वतों से घिरा है।
6 भराणसरताल
7 रोहीसाड़ा ताल –
8 खिड़ा ताल – इस ताल का जल अत्यन्त स्वच्छ है।
9 लामाताल
10 देवसाड़ी ताल
11 सरताल
12 परीताल

टिहरी की प्रमुख ताल/झीलें–
1 भिंलगताल
2 अप्सराताल – कहा जाता है। कि यहां अप्सराएं स्नान करने के लिए आती थी इस लिए इसे अछरी ताल भी कहा जाता है।
3 मंसूरताल – खतलिंग ग्लेशियर के सामने इस ताल से दूंधगंगा निकली है। यहां पर कभी-कभी राजहंस देखने को मिलते है।
4 बासुकी ताल – इस ताल की विशेषता यहां के जल का लाल होना है। अर्थात यह ताल लाल पानी वाला ताल है। यहां नीले रंग के कमल खिलते है।
5 महासर ताल – यह झील तो कटोरेनुमा आकार के तालें से मिलकर बनी है जिन्हें भाई-बहन का ताल कहा जाता है।
6 यमताल – यह ताल सबसे बर्फ से ढका रहता है।
7 सहस्त्रताल – यह गढ़वाल क्षेत्र का सबसे बड़ा और गहरा ताल है।

रुद्रप्रयाग की प्रमुख ताल/झीलें-

1 चोराबाड़ी ताल – इस ताल को गांधी सरोवर या शरवदीताल भी कहा जाता है। गांधी जी की अस्थियां यहीं प्रवाहित की गई थी। यह ताल केदारनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है।
2 बदाणी ताल – इस ताल के किनारे प्रत्येक वर्ष मेला लगता है।
3 देवरिया ताल – तुगंनाथ मंदिर के समीप स्थित है।
4 भेंकताल – इस ताल का आकार अंडाकार है।

देहरादून की प्रमुख ताल/झीलें –
1 चन्दबाड़ी ताल
2 काँसरोताल
पौड़ी  की प्रमुख ताल/झीलें-
1 दुग्धताल

चमोली की प्रमुख ताल/झीलें

1 सिद्धताल
2 नरसिंहताल – मातृकाताल से थोड़ा आगे।
3 मातृकाताल – इसे मातृशक्ति या देवियों का ताल भी कहते है।
4 मणिभद्रताल
5 गोहनाताल
6 काकभुशुंडीताल
7 झलताल
8 सुखताल
9 लिंगाताल या आंछरी ताल – यह एक अति सुन्दर ताल है। इस ताल के बीचों-बीच एक लिंगनुमा टापू है जिसके कारण इस ताल का नाम लिंगाताल पड़ा। यह ताल फूलों की घाटी के मध्य स्थित है। इस ताल के कुछ ही दूरी पर आंछरी ताल एक अलग सा ताल है।
10 विष्णुताल

11 बेनीताल – कर्णप्रयाग-नन्दप्रयाग मार्ग पर स्थित इस ताल के निकट नन्दादेवी का मन्दिर है।
12 विरहीताल – इस ताल को गौना झील के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है। कि अंग्रेजों के समय इस झील में नाव चलाई जाती थी।
13 सतोपंथ सत्यपद ताल – यह त्रिकोणियां ताल है। मान्यता है कि इसके तीनों कोणों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने तपस्या की थी। इसी ताल के निकट सूर्यकुण्ड और चंद्रकुण्ड नामक दो ताल है। अंलकनदा का उद्गम स्थल इसी ताल से है।
14 लोकपाल या हेमकुण – यह ताल सिक्ख धर्म का धार्मिक ताल है। इस ताल के किनारे सिक्ख धर्म के 10वें गुरु गोविन्द सिंह ने तपस्या की थी। यहां एक गुरुद्वारा हेमकुण्ड साहेब भी है। यहां पर लक्ष्मण जी का मंदिर भी है और इसी स्थान से लक्ष्मण गंगा नदी का उद्गम है। यह ताल 7 पर्वतों से घिरी है।
15 होमकुण्ड – यहा कुण्ड हिन्दु धर्म में विशेष महत्व रखता है। नदंा राज यात्रा के समय इसी स्थान से चार सिंगों वाल मेढ़ा यहा से अकेला जाता है।
16 रूपकुण्ड – बेदनी बुग्याल के निकट है। कहा जाता है की इस ताल का निर्माण शिव-पार्वती ने कैलाश जाते हुए किया था। मा पार्वती ने अपने सौन्दर्य का आधा भाग इसी कुण्ड (ताल) में छोड़ दिया था जिसके कारण इसे रूपकुण्ड कहा जाता है। किसी राजा और उसकी सेना के कंकाल यहां पर मिलने के कारण इसे कंकालीताल भी कहा जाता है।
17 ताराकुण्ड
18 अरवाताल

हरिद्वार –
1 दिव्य सरोवर

नैनीताल की प्रमुख ताल/झीलें-

1 नैनीताल – इसे ऋषि सरोवर कहा जाता है। पुराणों में इसे त्रि-ऋषि सरोवर कहा गया है। यहा ताल 7 पर्वतों से घिरा हुआ है। बालिया नदी का उद्गम स्थिल यहीं से है। नैनीताल दो भागों में बंटता है उत्तरी भाग को मल्लीताल और दक्षिणी भाग को तल्लीताल कहा जाता है। कहा जाता है कि इस झील का निर्माण भगवान शिव की पत्नी माता सती के नयन गिरने से हुई था। इसी झील के किनारे माता नैनादेवी शक्तिपीठ मंदिर है। इस झील की खोज सी.पी. बैरन ने 1841 में की थी।
2 भीमताल –

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